रंजिश-ए-ख़ामोशी

शांत था मैं उस दिन। इस वाक्य को दोहराते हुए अब मुझे एक महीना होने को था। कारण? किसी अपने की कमी थी। शायद मेरा नाम लेने वाला कोई अपना अब नहीं रहा था। शायद किसी मधुर आवाज़ की खोज थी। कोई ऐसा जो नाम भले ही दिन में एक बार ले, पर जिस दिन…

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रिज़ल्ट का हौवा

रिज़ल्ट का हौवा

29 मई, 2018, हाँ, यही शुभ दिन था जब घर की चिराग कुसुम बेटी की धड़कनें तेज़ हुई जा रही थीं। मन के किसी कोने में उत्साह को दबाये, वो अपनी व्याकुलता का पूरे घर में खुलेआम प्रदर्शन कर रही थी। सूरज सर पे आने लगा था, 11 बज चुके थे परंतु अभी तक माताश्री…

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