रंजिश-ए-ख़ामोशी

शांत था मैं उस दिन। इस वाक्य को दोहराते हुए अब मुझे एक महीना होने को था। कारण? किसी अपने की कमी थी। शायद मेरा नाम लेने वाला कोई अपना अब नहीं रहा था। शायद किसी मधुर आवाज़ की खोज थी। कोई ऐसा जो नाम भले ही दिन में एक बार ले, पर जिस दिन…

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वफ़ा की बेवफ़ाई

वफ़ा की बेवफ़ाई

  मेरी मिन्नतों, औ’ तेरी ज़िल्लतों ने बर्बाद कर दिया, मेरी मिन्नतों, औ’ तेरी ज़िल्लतों ने बर्बाद कर दिया; धड़कन थी तुम, मेरी धड़कन थी तुम, जाओ दिल से ही आज़ाद कर दिया. – तनय केडिया