कविता (मानव छंद)

कविता समाज का दर्पण अंतर्मन का अर्पण है, साहित्य के अंशुमाली का यह आत्म समर्पण है। अलंकार रस छंद सभी निज भावों की भाषा है, गति-यति-लय मिलन बिंदु पर सुख-दुख की परिभाषा है। व्यथित हृदय प्यासे को ज्यों दरिया देत दिलासा है, लश्तम-पश्तम में हिय निज भरती यह जिज्ञासा है। मदमस्ती मदहोशी है बेहोशी खामोशी…

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