मैं, रिलीजन, और विचारधाराएँ

लोग अक्सर पूछते हैं कि क्या मैं हिन्दू या मुस्लिम विरोधी हूँ, या बीजेपी सपोर्टर, या कम्यूनिस्ट, या वामपंथी, या संघी। मुझे खुद नहीं पता कि मैं क्या हूँ। घर का माहौल सॉफ्ट हिंदुत्ववादी रहा (यह शब्द इसी साल काँग्रेस द्वारा प्रतिपादित हिंदुत्व को दिया गया है)। अतः धार्मिक मामलों में थोड़े-बहुत सनातन संस्कार मिले।…

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अंतर्क्लबीय राजनीति

अंतर्क्लबीय राजनीति

पहली प्रस्तावना: मैं अक्सर कहता हूँ कि श्रीकृष्ण एक अच्छे राजनीतिज्ञ थे. यहाँ तक कि उन्होंने ‘फूट डालो, आराम से रहो’ की नीति अपनाई. कौरवों और पांडवों को आपस में लड़ाकर एक पक्ष का साथ दिया और हस्तिनापुर राज्य के पड़ोस में ही द्वारका बसाकर चैन की बंशी बजाने लगे. मथुरा से भाग आये थे…

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MMV वाली लड़की

MMV वाली लड़की

“तुम समझते क्यों नहीं हो श्वेतांक शौक़ के लिये लिखना अलग बात है. तुम बहुत अच्छा लिखते हो, लेकिन सिर्फ प्यार भरी शायरी सुनकर पेट की भूख नहीं मिटती, ये कहानियाँ आपकी ख्वाहिशें पूरी नहीं कर सकतीं. सोसाइटी में जीने के लिये एक स्टेटस बना कर चलना पड़ता है. अब या तो तुम कोई कोर्स…

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गिरते हुए पुल

गिरते हुए पुल

किसी मंत्री की बीवी के जो पैरों में पड़ी पायल, या उसके हाथ में हीरे जड़ी कोई अंगूठी है। इसी के ख़र्च से झुककर गिरा मेरे शहर में पुल; इसी कंक्रीट में दबकर मरी इक माँ की बेटी है। महीने भर की है तनख़्वाह हज़ारी, तीस या चालीस। उसी अफ़सर के घर में है जो…

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सज़दा

सज़दा

लखनऊ की किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के सामने वाली सड़क पर चहल-पहल तेज़ हो गयी है. सुबह के कुछ 9 बजे रहे हैं. और नवाबों के शहर की शहज़ादी साहिबा अभी तक आराम फरमा रहीं हैं. मोहतरमा जबसे हॉस्टल में आयीं हैं तबसे खुद को डॉक्टर समझने लगी हैं, सुबह 4 बजे शब्बा ख़ैर होती है…

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