उन कदमों की आहट

मेरे सामने हज़ारों-हज़ार की भीड़ सभागार में खचाखच भरी हुई है। गूँजते शोरों और पसरे हुए अँधेरों से अलग मैं मंच पर आज गायकी का एक सितारा बन गया हूँ। मेरे सारे ख़्वाब कामिल हो गए हैं। मैं धीरे से आँखें बंद करता हूँ, और मुझे वो ख़ास दिन याद आ जाता है जब इस…

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भीड़तंत्र

केश-गुच्छों को पकड़ कर नग्न-तन को खींचता द्रौपदी को ऐसे दुःशासन घसीटे जा रहा, रक्त आते हैं निकलकर वक्ष जिनमें दुग्ध है देख कर सारा तमाशा भीड़ हँसते जा रहा। उस सभा के सब सुधीजन बन गए धृतराष्ट्र हैं कर्णभेदी याचना है पर वधिर सब बन गए, है महज अपराध उसका वो कोई निर्दोष है…

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एक पत्र मृत्यु के नाम

एक पत्र मृत्यु के नाम

प्रिय मृत्यु! आख़िरकार तुम आ ही गयीं! जिस चीज़ का डर था वो हो ही गया।अब इससे पहले कि तुम मुझे अपनी बाँहों के आग़ोश में लेकर मेरे होंठों को सदा के लिए चूम लो, मैं कुछ स्वीकार करना चाहता हूँ, तुम्हारी सहेली ज़िन्दगी के बारे में। हमारा प्रेम-प्रसंग चल रहा था, सालों से! तुमने…

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