काठ की गुड़िया

काठ की गुड़िया

काठ की गुड़िया. बचपन का ज़रिया. निर्धन हूँ, बापू की बुचिया. ज़िद कर डाली, लाने को कंचे. बैठा भेड़इया दूर कहीं. ले आये पटरा-सटरा, आकार दिया, दिन रात दिया. कपड़े सिले, पहनाये. हाथ दिया मैं ना मानी; बापू समझाते यही बढ़िया, काठ की गुड़िया. काहे रोती? मत रो बुचिया! बहके मन को जोत दिया. माई ने गोद भरा, कहती—यह सब मोह भरा! मेरी गुड़िया! बापू मेरे भी यही किया; तू भी रख ले, काठ की गुड़िया. कई वर्ष हुए. मैं नर्स हुई. उगते जीवन का हर्ष हुई. नन्ही हथेलियाँ स्पर्श हुईं. मैं स्वावलंबी उत्कर्ष हुई. बापू तुमने साकार किया. सपना मेरा,  विश्वास किया. अर्थ दिए, सामर्थ्य दिए. अब रोज़ बनाती; प्राण की गुड़िया, संसार की गुड़िया, धनवान की गुड़िया, अनजान की गुड़िया. बस बना ना पायी, वरदान की गुड़िया; काठ की गुड़िया. माँ के संघर्षो को प्रणाम! बापू तुम सबसे महान! रस्ता ये अलग तुमने ठाना. बेटी को बेटा माना.…

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अंतर्क्लबीय राजनीति

अंतर्क्लबीय राजनीति

पहली प्रस्तावना: मैं अक्सर कहता हूँ कि श्रीकृष्ण एक अच्छे राजनीतिज्ञ थे. यहाँ तक कि उन्होंने ‘फूट डालो, आराम से रहो’ की नीति अपनाई. कौरवों और पांडवों को आपस में लड़ाकर एक पक्ष का साथ दिया और हस्तिनापुर राज्य के पड़ोस में ही द्वारका बसाकर चैन की बंशी बजाने लगे. मथुरा से भाग आये थे…

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क्या तुम मेरे साथ चलोगे?

क्या तुम मेरे साथ चलोगे?

कुबेर का हाथ नहीं है; पर वक़्त की बरसात है. क्या इस सावन मेरे साथ बरसोगे? क्या तुम मेरे साथ चलोगे?   शान्ति की सौगात नहीं है; शोर भरी ये रात है. क्या इस अमावस मेरे साथ डूबोगे? क्या तुम मेरे साथ चलोगे?   सफलता की ज़मानत नहीं है; वादों की बैसाख है. क्या ज़िन्दगी…

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एक पत्र मृत्यु के नाम

एक पत्र मृत्यु के नाम

प्रिय मृत्यु! आख़िरकार तुम आ ही गयीं! जिस चीज़ का डर था वो हो ही गया।अब इससे पहले कि तुम मुझे अपनी बाँहों के आग़ोश में लेकर मेरे होंठों को सदा के लिए चूम लो, मैं कुछ स्वीकार करना चाहता हूँ, तुम्हारी सहेली ज़िन्दगी के बारे में। हमारा प्रेम-प्रसंग चल रहा था, सालों से! तुमने…

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World Environment Day: Things We Have Been Doing Wrong at IIT (BHU)

World Environment Day: Things We Have Been Doing Wrong at IIT (BHU)

Today I saw many WhatsApp stories. Clubs, councils, and teams of our college fests have made beautiful posters on the world environment day and all the respective members were asked to share those posters. Nice! You are using this day for your promotion creatively. But in between all this something triggered me. What else can we do…

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ख़त

ख़त

  मेरे प्यारे भगवान्, मेरे निराले भगवान्। मेरी तमाम खुशियों के लिए शुक्रिया।हाँ, आप ही को ख़त लिख रहा हूँ। कुछ कहना है आपसे। क्यों कह रहा हूँ, जानते हैं? मैंने यह महसूस किया है कि जब दर्द को शब्द का लिबास मिल जाता है, तो वह थोड़ा कम हो जाता है। मैं जानता हूँ…

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रिज़ल्ट का हौवा

रिज़ल्ट का हौवा

29 मई, 2018, हाँ, यही शुभ दिन था जब घर की चिराग कुसुम बेटी की धड़कनें तेज़ हुई जा रही थीं। मन के किसी कोने में उत्साह को दबाये, वो अपनी व्याकुलता का पूरे घर में खुलेआम प्रदर्शन कर रही थी। सूरज सर पे आने लगा था, 11 बज चुके थे परंतु अभी तक माताश्री…

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Killshot

Killshot

  I strolled about, and in and out, I tottered the woods in the snow; My heavenly beard flowing out No whiter than the snow. At some time it did pass Behind the tall trees and grass- A striking buck with antlers nine, Gracing the snowy woods divine. I drew back, death ready to hit,…

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